ApnaCg भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों की अब खैर नहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव सिंघम को बना रहे EOW चीफ, तेज होंगे छापे

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अक्षय लहरे 8319900214

रायपुर@अपना छत्तीसगढ़ । भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है भ्रष्ट आचरण। ऐसा कार्य जो अपने स्वार्थ सिद्धि की कामना के लिए समाज के नैतिक मूल्यों को ताक पर रख कर किया जाता है, भ्रष्टाचार कहलाता है। भ्रष्टाचार भारत समेत अन्य विकासशील देश में तेजी से फैलता जा रहा है। भ्रष्टाचार के लिए ज्यादातर हम देश के राजनेताओं को ज़िम्मेदार मानते हैं पर सच यह है कि देश का आम नागरिक भी भ्रष्टाचार के विभिन्न स्वरूप में भागीदार हैं। वर्तमान में कोई भी क्षेत्र भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है।गौरतलब हो कि अवैध तरीकों से धन अर्जित करना भ्रष्टाचार है, भ्रष्टाचार में व्यक्ति अपने निजी लाभ के लिए देश की संपत्ति का शोषण करता है। यह देश की उन्नति के पथ पर सबसे बड़ा बाधक तत्व है। व्यक्ति के व्यक्तित्व में दोष निहित होने पर देश में भ्रष्टाचार की मात्रा बढ़ गई है।बताना लाजमी होगा कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की अब शामत आने वाली है। छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार के मामले में देश में कुख्यात हो गया है। छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी देश में सबसे भ्रष्ट ब्यूरोक्रेसी मानी जा रही है। आलम यह है कि छत्तीसगढ़ के दो डायरेक्ट आईएएस इस समय जेल में है। इसके बावजूद भ्रष्टाचार को लेकर न तो अफसरों में कोई खौफ है और न ही सरकारी स्तर पर नियंत्रण। मगर साफ-सुथरी छबि के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 20 साल सांसद रहे। इतने लंबे संसदीय जीवन और तीन बार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहने के बाद उनका सार्वजनिक जीवन बेदाग है। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद राजधानी के माफिया वर्ग में छटपटाहट है क्योंकि कोई दाल नहीं गल रही।


सीएम विष्णुदेव साय संभलकर काम कर रहे हैं मगर ठोस अंदाज में। कल उन्होंने ईओडब्लू की पूरी टीम बदलकर लोगों को चौंका दिया। इसके साथ ही 30 अफसरों की पोस्टिंग भी कर दी। बताते हैं, सीएम अब भ्रष्ट तंत्र पर लगाम लगाने का ब्लूपिं्रट तैयार कर लिए हैं। इसके लिए एक तेज-तर्रार आईपीएस अफसर को ईओडब्लू का चीफ बनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का सिंघम कहा जाने वाले इस अफसर के नाम से गुंडा, बदमाश और माफिया कांपते हैं। ईओडब्लू मे ंचूकि कई हाई प्रोफाइल मामले इस समय दर्ज है। इनमें पीएससी से लेकर आबकारी, कोयला और राशन घोटाला शामिल है। इसके अलावा बढ़ते भ्रष्टचार पर लगाम भी लगाना है। इसलिए, केद्रीय जांच एजेंसी में रहे अफसर को इस प्रदेश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी का मुखिया बनाया जा रहा है। इन मामलों की जांच-पड़ताल के साथ ही अब करप्शन के खिलाफ मुहिम छेड़ी जाएगी। पिछले पांच साल में सिर्फ एडीजी जीपी सिंह के यहां छापे पड़े। इसके अलावा किसी भी अफसर के यहां छापा नहीं डाला गया।


*राजस्थान की तर्ज पर पावरफुल*

अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की ईओडब्लू, एसीबी को अब राजस्थान के ईओडब्लू की तरह ताकतवर और एक्टिव बनाया जाएगा। वहां की ईओडब्लू इतनी ताकतवर है कि आईएएस, आईपीएस अफसरों को गिरफ्तार करने से नहीं चूकती। छत्तीसगढ़ में ईओडब्लू को कभी मजबूत करने का प्रयास नहीं किया गया। मुकेश गुप्ता के समय भी नहीं। कई अफसरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति की फाइल भेजने में सिस्टम रोड़ा बनकर सामने खड़ा हो गया।

*भ्रष्टाचार का दलदल*

भ्रष्ट अफसरों ने छत्तीसगढ़ में अति मचा दिया है। उपर से लेकर नीचे तक होड़ मची है। चाहे आईएएस, आईपीएस, आईएफएस हो या फिर नीचे का मुलाजिम, बिना पैसे का काम नहीं होगा। पिछले पांच साल में तो कोई रेट भी नहीं रहा। जितना मांग दिए, उतना देना होगा। बिना पैसे का काम होना छत्तीसगढ़ में मुमकिन नहीं। अनुकंपा नियुक्ति और चाइल्ड केयर लीव के लिए अगर पैसा नहीं दिए तो बड़े बाबू फाइल आगे नहीं बढ़ाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग में डीईओ, बीईओ इसी में पैसा कमा रहे क्योंकि वहां वौल्यूम ज्यादा है।

*भ्रष्टाचार क्या है?*

भ्रष्टाचार एक ऐसा अनैतिक आचरण है, जिसमें व्यक्ति खुद की छोटी इच्छाओं की पूर्ति हेतु देश को संकट में डालने में तनिक भी देर नहीं करता है। देश के भ्रष्ट नेताओं द्वारा किया गया घोटाला ही भ्रष्टाचार नहीं है अपितु एक ग्वाले द्वारा दूध में पानी मिलाना भी भ्रष्टाचार का स्वरूप है।


*भ्रष्टाचार के कारण-देश का लचीला कानून*

भ्रष्टाचार विकासशील देश की समस्या है, यहां भ्रष्टाचार होने का प्रमुख कारण देश का लचीला कानून है। पैसे के दम पर ज्यादातर भ्रष्टाचारी बाइज्जत बरी हो जाते हैं, अपराधी को दण्ड का भय नहीं होता है।

*व्यक्ति का लोभी स्वभाव*

लालच और असंतुष्टि एक ऐसा विकार है जो व्यक्ति को बहुत अधिक नीचे गिरने पर विवश कर देता है। व्यक्ति के मस्तिष्क में सदैव अपने धन को बढ़ाने की प्रबल इच्छा उत्पन्न होती है।
आदत – आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व में बहुत गहरा प्रभाव डालता है। एक मिलिट्री रिटायर्ड ऑफिसर रिटायरमेंट के बाद भी अपने ट्रेनिंग के दौरान प्राप्त किए अनुशासन को जीवन भर वहन करता है। उसी प्रकार देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से लोगों को भ्रष्टाचार की आदत पड़ गई है।

*मनसा*

व्यक्ति के दृढ़ निश्चय कर लेने पर कोई भी कार्य कर पाना असंभव नहीं होता वैसे ही भ्रष्टाचार होने का एक प्रमुख कारण व्यक्ति की मनसा (इच्छा) भी है।भ्रष्टाचार देश में लगा वह दीमक है जो अंदर ही अंदर देश को खोखला कर रहा है। यह व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना है जो यह दिखाता है व्यक्ति लोभ, असंतुष्टि, आदत और मनसा जैसे विकारों के वजह से कैसे मौके का फायदा उठा सकता है।अपना कार्य ईमानदारी से न करना भ्रष्टाचार है अतः ऐसा व्यक्ति भ्रष्टाचारी है। समाज में आये दिन इसके विभिन्न स्वरूप देखने को मिलते हैं। भ्रष्टाचार के संदर्भ में यह कहना मुझे अनुचित नहीं लगता, वही व्यक्ति भ्रष्ट नहीं हैं जिन्हें भ्रष्टाचार करने का अवसर नहीं मिला।

*भ्रष्टाचार के विभिन्न प्रकार :-रिश्वत की लेन-देन*

सरकारी काम करने के लिए कार्यालय में चपरासी (प्यून) से लेकर उच्च अधिकारी तक आपसे पैसे लेते हैं। इस काम के लिए उन्हें सरकार से वेतन प्राप्त होता है वह वहां हमारी मदद के लिए हैं। इसके साथ ही देश के नागरिक भी अपना काम जल्दी कराने के लिए उन्हे पैसे देते हैं अतः यह भ्रष्टाचार है।

*चुनाव में धांधली*

देश के राजनेताओं द्वारा चुनाव में सरेआम लोगों को पैसे, ज़मीन, अनेक उपहार तथा मादक पदार्थ बांटे जाते हैं। यह चुनावी धान्धली असल में भ्रष्टाचार है।
भाई-भतीजावाद – अपने पद और शक्ति का गलत उपयोग कर लोग भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देते हैं। वह अपने किसी प्रिय जन को उस पद का कार्यभार दे देते हैं जिसके वह लायक नहीं हैं। ऐसे में योग्य व्यक्ति का हक उससे छिन जाता है।

*नागरिकों द्वारा टैक्स चोरी*

नागरिकों द्वारा टैक्स भुगतान करने हेतु प्रत्येक देश में एक निर्धारित पैमाना तय किया गया है। पर कुछ व्यक्ति सरकार को अपने आय का सही विवरण नहीं देते और टैक्स की चोरी करते हैं। यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में अंकित है।

*शिक्षा तथा खेल में घूसखोरी*

शिक्षा तथा खेल के क्षेत्र में घूस लेकर लोग मेधावी व योग्य उम्मीदवार को सीटें नहीं देते बल्कि जो उन्हें घूस दे, उन्हें दे देते हैं।इसी प्रकार समाज के अन्य छोटे से बड़े क्षेत्र में भ्रष्टाचार देखा जा सकता है। जैसे राशन में मिलावट, अवैध मकान निर्माण, अस्पताल तथा स्कूल में अत्यधिक फीस आदि। यहां तक की भाषा में भी भ्रष्टाचार व्याप्त है। अजय नावरिया के शब्दों में “मुंशी प्रेमचंद्र की एक प्रसिद्ध कहानी सतगति में लेखक द्वारा कहानी के एक पात्र को दुखी चमार कहा गया है, यह आपत्तिजनक शब्द के साथ भाषा के भ्रष्ट आचरण का प्रमाण है। वहीं दूसरे पात्र को पंडित जी नाम से संबोधित किया जाता है। कहानी के पहले पात्र को “दुखी दलित” भी कहा जा सकता था।“

*भ्रष्ट्राचार के परिणाम*

समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार देश की उन्नति में सबसे बड़ा बाधक तत्व है। इसके वजह से गरीब और गरीब होता जा रहा है। देश में बेरोजगारी, घूसखोरी, अपराध की मात्रा में दिन-प्रतिदन वृद्धि होती जा रही है यह भ्रष्टाचार के फलस्वरूप है। किसी देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारणवश परिणाम यह है की विश्व स्तर पर देश के कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए जाते हैं।

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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