ApnaCg@गौमूत्र से बने जीवामृत एवं ब्रम्हास्त्र का किसान कर रहे हैं फसलों में उपयोग

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जांजगीर-चांपा@अपना छत्तीसगढ़ – जिले में गोधन न्याय योजना के माध्यम से तिलई एवं खोखरा गौठान में गौमूत्र की खरीदी हरेली त्यौहार से लगातार की जा रही है। गौमूत्र की खरीदी होने के बाद कृषि वैज्ञानिकों के सहयोग से स्व सहायता समूह के द्वारा गौमूत्र से जीवामृत एवं ब्रम्हास्त्र तैयार किया जा रहा हैं।

जिसके बनने के बाद गांव के किसान अपनी फसलों में उपयोग कर रासायनिक खाद की जगह जैविक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत गोधन न्याय योजना का कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा के निर्देशन एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ.फरिहा आलम के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। जि.पं.सीईओ ने बताया कि अकलतरा विकास खण्ड की तिलई गौठान एवं नवागढ़ विकास खण्ड की खोखरा गौठान में गौमूत्र की खरीदी गौठान समिति के द्वारा की जा रही है। तिलई गौठान में गौमूत्र की खरीदी 310 लीटर एवं खोखरा गौठान में 124 लीटर गौमूत्र खरीदी गया। इस प्रकार जिले में दोनों गौठानों में 434 लीटर गौमूत्र की खरीदी हुई है।


किसानों को मिल रहा फायदा जिले में गौठानों में गौमूत्र की खरीदी के उपरांत तिलई के आरती स्व सहायता समूह एवं खोखरा गौठान के सागर स्व सहायता समूह के द्वारा जीवमृत एवं ब्रम्हास्त्र तैयार किया जा रहा है।


गौठान से किसान खिलेन्द्र एवं अजय के द्वारा जीवामृत खरीद कर उसे अपनी फसलों में उपयोग में लाया गया। तो वहीं भीम,देवराज बलराम,सिवा राम,गजेन्द्र आदि ने ब्रम्हास्त्र का उपयोग अपनी फसलों में किया है।


कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार तिलई गौठान एवं खोखरा गौठान में 434 लीटर गौमूत्र की खरीदी की गई। खरीदी के उपरांत कीट नियंत्रक (ब्रम्हास्त्र) 86 लीटर एवं वृद्धिवर्धक (जीवामृत) 600 लीटर उत्पादन किया गया। उत्पादन के उपरांत 61 लीटर कीट नियंत्रक एवं 580 लीटर वृद्धि वर्धक का विक्रय किसानों को अब तक किया जा चुका है। दोनों गौठानों में सतत रूप से जीवामृत एवं ब्रम्हास्त्र का उत्पादन किया जा रहा है।


रासायनिक खाद से जैविक खाद की ओर फसलों को रसायनिक कीटनाशकों के उपयोग के विकल्प के रूप में गोबर से बनी वर्मी कम्पोस्ट एवं गौमूत्र से बने जीवामृत एवं ब्रम्हास्त्र के उपयोग की सलाह किसानों को लगातार दी जा रही है। जिले के जागरूक किसानों द्वारा वर्मी कम्पोस्ट एवं जीवामृत व ब्रम्हास्त्र का उपयोग करने लगे हैं, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। एक बार जो किसान इसका उपयोेग कर रहे है, वह दोबारा फिर से ले जा रहे हैं। कीट नियंत्रक(ब्रम्हास्त्र) का विक्रय मूल्य 50 रूपए एवं वृद्धिवर्धक (जीवामृत) का विक्रय मूल्य 40 रूपए लीटर है।

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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