ApnaCg@पिता स्टेट-बैंक में सुरक्षा-गार्ड पुत्र भारतीय-सेना में सिपाही पिता-पुत्र से वार्डवासी-हलाकान…पुत्र सेना में जवान होने का रौब झाड़ता-फिरता….ड्यूटी पर कम छुट्टी में ज्यादा रहता है।

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वार्डवासी-सहित प्रशासनिक-अधिकारी पिता-पुत्र के क्रियाकलापों से परेशान प्रशासनिक-अधिकारियों के कार्यो में व्यवधान…सेना के कमान्डेंट-अधिकारियों का हवाला देकर…प्रशासनिक-अधिकारियों पर बनाता है दबाव।

सुरक्षा गार्ड पिता-व-सेना के जवान पुत्र के खिलाफ जिला-कलेक्टर से लेकर भारतीय सेना के मुख्यालय तक शिकायत दर्ज कराने को लेकर तैयारी।

करगीरोड/कोटा@अपना छत्तीसगढ़ न्यूज – भारतीय-सेना में जाने का जज्बा देश के हर युवा का सपना होता है..देश की रक्षा व देश में रहने वाले आमजनो की सुरक्षा करने वाले भारतीय-सेना के जवानों के प्रति देश का हर जिम्मेदार-नागरिक उसकी बहादुरी पर गौरवान्वित होता है..और आकस्मिक-घटना हो जाने पर जवानों की शहादत पर काफी दुखी भी होता है इसलिए इस भारत देश के किसी भी कोने के-गांव-कस्बो में भारतीय-सेना की वर्दी पहने कोई भी जवान को देखते ही जय हिंद के नारों के साथ सेल्यूट करने के लिए बच्चे हो या बुजुर्ग-या फिर युवा स्वत: से ही उनके हाथ उठ जाते हैं सेना में नौकरी करने वाले भारतीय जवान जब छुट्टी पर अपने घर आता है..अपने घर परिवार दोस्तो के साथ मिलकर अपने पलो को जीता है..आंखों में अलग ही खुशी होती है।

बुजुर्गों की कही गई एक पुरानी कहावत चरितार्थ हुई:—-

एक बहुत पुरानी कहावत है..जिसका आज भी उदाहरण बड़े-बुजुर्गों द्वारा दिया जाता है एक सड़ी-मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है..ऐसी ही एक इसके विपरीत कहानी कोटा-नगर से गए एक सेना के जवान की है जो कि वर्तमान में भारतीय सेना में सिपाही के रूप में पदस्थ है जिसका अधिकांश समय सेना की ड्यूटी कम छुट्टी पर घर मे विवादों में ज्यादा ही बीतता है सेना के जवान छुट्टी पर घर आकर अपने और अपनों के बीच खुशियां बांटने का कार्य करते है वही पर ये सेना का जवान इन सभी कार्यो को छोड़कर नगर-मोहल्ले में रहने वाले अपने से कमजोर लोगो पर जुल्म करता है सेना का जवान होने को लेकर लोगो को धमकाता-चमकाता है शासकीय-कार्यो में पदस्थ प्रशासनिक-अधिकारियों पर अवैधानिक कार्य करने को लेकर दबाव बनाता है..न्यायलीन-कार्यो में व्यवधान पैदा करता है.. प्रशासनिक-अधिकारियों द्वारा समझाइश दिए जाने पर सेना का जवान होने का रौब दिखाते हुए प्रशासनिक-अधिकारियों की ही शिकायत दर्ज करा देता है..कभी किसी 75/80 साल के बुजुर्ग की स्वयं की जमीन पर बन रहे आवास निर्माण रोकवा देता है,तो कभी मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति पर हाथ छोड़ देता है,तो कभी 25/30 सालों से अपने और अपने परिवार का पेट पाल रहे दुकानदार की दुकानदारी बंद करवाने के लिए अपने कमांडेंट-अधिकारी को मिसगाइड करते हुए जिला-कलेक्टर से लेकर एसडीएम-नायाब तहसीलदार राजस्व-निरीक्षक तक के अधिकारियों पर दबाव बनाने का कार्य करता है.प्रशासनिक-अधिकारियों पर नियम-विरुद्ध कार्य करने के लिए अपने आर्मी में होने का दबाव बनाता है प्रशासनिक-अधिकारियों से दुर्व्यवहार करता है.न्यायालीन-कार्यो के बीच व्यवधान पैदा करता है प्रशासनिक-अधिकारियों द्वारा समझाइश देने पर उन्ही प्रशासनिक-अधिकारियों के खिलाफ उच्च-अधिकारियों थाने में शिकायत दर्ज कराता है।

अवैध-निर्माण अतिक्रमण को लेकर शिकायत आवेदन:–

कोटा-तहसील-कार्यालय में एक राजस्व मामले को लेकर आवेदक ओंकार-दुबे द्वारा सेवानिवृत्त पूर्व नगर पंचायत कर्मचारी अब्दुल रब के खिलाफ अवैध-निर्माण-अतिक्रमण हटाने आवेदन-सौंपा था..जिस पर कोटा-नायाब तहसीलदार रमेश कुमार ने सुनवाई करते हुए आवेदक ओंकार दुबे पर बिना-कोई डॉक्यूमेंट एविडेंस के साथ विदाउट-एफिडेविट पेश करते हुए निर्माण कार्य रोकने आवेदक के विरुद्ध जारी स्थगन में आदेश को निरस्त करते हुए अपने आदेश में आवेदक ओंकार दुबे पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि वृद्ध को बेवजह परेशान किया गया है..उसके अलावा आवेदक ओंकार दुबे के पुत्र अभिजीत दुबे पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि अभिजीत दुबे जो कि वर्तमान में भारतीय सेना में एक सिपाही के रूप में कार्यरत है..न्यायालय में उपस्थित होकर अनुशासनहीनता का परिचय दिया न्यायालीन कार्य मे बाधा उत्पन्न किया गया..कोर्ट का समय बर्बाद किया गया आवेदक का आवेदन पत्र स्थगन आदेश के साथ आवेदन पत्र खारिज किया जाए जाता है..एवं प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है.. नायाब तहसीलदार रमेश कुमार के आदेश के खिलाफ सेना के जवान अभिजीत दुबे के द्वारा नायाब तहसीलदार के खिलाफ एसडीएम कोटा सहित कोटा थाने सहित अन्य विभागीय-कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराया गया है।

नायाब तहसीलदार कोटा रमेश कुमार ने कहा:–

नायाब-तहसीलदार रमेश कुमार ने कहा कि राजस्व मामले में दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लिए जाते है..अगर आप निर्णय से नाखुश है..तो आगे अपील का प्रावधान है.. न्यायालीन-कार्य मे व्यवधान उत्पन्न करने के बजाए..सेना में अनुशासन होना सिखाया जाता है..अनुशासन-हीनता नही।

एसडीएम-कोटा सूरज साहू ने कहा:—

सेना के जवान अभिजीत दुबे के द्वारा न्यायालीन-कार्य मे व्यवधान उत्पन्न करने के साथ नायाब तहसीलदार-तहसील कार्यालय के एक कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार करने के मामले पर कोटा-एसडीएम सूरज साहू से बात की जिस पर एसडीएम-कोटा ने कहा कि नायाब तहसीलदार के द्वारा सेना के जवान अभिजीत दुबे के खिलाफ कोई पत्र प्रेषित नही किया गया है..अगर कुछ ऐसा होगा कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

अब पिता-पुत्र के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने लामबंद हुए प्रताड़ित लोग:—–

ओंकार दुबे जो कि बैंक में गार्ड व उसके पुत्र अभिजीत दुबे जो कि भारतीय सेना में एक सिपाही के रूप में पदस्थ है..इस पूरे मामले की अलग से पड़ताल की गई जिस पर वार्ड में रहने वाले लोगो सहित वार्ड-पार्षद व अन्य जनप्रतिनिधियों ने बताया कि जबसे सेना के सिपाही के रूप में ओंकार दुबे का पुत्र पदस्थ हुआ है..तबसे ओंकार दुबे सहित उसके सिपाही पुत्र के व्यवहार में बदलाव आ गया है बिना कारण बेवजह लोगो के खिलाफ शासकीय-कार्यालयों में शिकायत पत्र सौंपकर लोगो को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना..वार्ड में रहने वालों के अलावा इसमे ओंकार दुबे के रिश्तेदार भी शामिल हैं जो की प्रताड़ित है..नगर पंचायत कोटा से ओंकार दुबे के द्वारा बनाए गए अपने नवीन भवन निर्माण से संबंधित बिना अनुमति-अनुज्ञा-टेक्स नियमो का पालन भी नही किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है..भवन निर्माण संबंधित राजस्व-दस्तावेजो-रजिस्ट्री संबंधित दस्तावेजो में भी गड़बड़ी की बात की गई जिसको लेकर जिला-कलेक्टर से लेकर एसडीएम कोटा तक शिकायत दर्ज कराने व कार्यवाही को लेकर पिता-पुत्र से प्रताड़ित लोगो के द्वारा कही गई है.. इसके अलावा सेना के जवान अभिजीत दुबे के खिलाफ भारतीय सेना के मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराने की बात भी लोगो द्वारा कही गई है।

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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