ApnaCg @करगीरोड-स्टेशन की रेल-पटरी पर बैठकर मंत्री-सांसद-विधायक के इंतजार में कोटा-नगरवासी।

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पिछले 02-सालों से ट्रेनों का स्टॉपेज करगीरोड-स्टेशन में बंद कर दिया गया है..नगर-संघर्ष-समिति-कोटा जमीनी के साथ कानूनी-लड़ाई रहा है।

08-आंदोलनकारियो के खिलाफ अपराध-पंजीबद्ध कर…01-लाख रुपए से ऊपर का क्षतिपूर्ति मांग रहा है..रेलवे प्रबंधन।

करगीरोड-कोटा @अपना छत्तीसगढ़ – रेलवे-विभाग के द्वारा बिना पूर्व सूचना के 22-से 23-यात्री-ट्रेनें रद्द करने के बाद से राजधानी-रायपुर से लेकर न्यायधानी-बिलासपुर सहित ऊर्जा-नगरी-कोरबा तक महासंग्राम मचा हुआ है..प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश-बघेल के नाराजगी के बाद छत्तीसगढ़-शासन के अपर सचिव ने रेलवे प्रशासन को पत्र प्रेषित कर मुख्यमंत्री के नाराजगी से अवगत कराया प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश के कद्दावर व राजस्व मंत्री जयसिंह-अग्रवाल सहित विधायकों-स्थानिय-जनप्रतिनिधियों ने भी रेलवे-प्रबंधन के खिलाफ अब मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है.आज के प्रमुख दैनिक अखबारों में रेलवे-प्रबंधन के खिलाफ मुख्यमंत्री-राजस्व-मंत्री के बयान के बड़े-बड़े हेडलाइन छपे हुए हैं राजस्व-मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने तो बैठक के दौरान जिला-कलेक्टर की उपस्थिति में डीआरएम-बिलासपुर आलोक सहाय को रद्द की गई..ट्रेनों को त्वरित रूप से शुरू करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दे डाली कि ट्रेनों के परिचालन पुनः से शुरू नही होने पर कोरबा से कोयला लदान रोक दिया जाएगा..इसके साथ ही “पटरी पर खाट डालकर” बैठने की बात अखबारों की सुर्खियों बटोर रही है..दोपहर होते-होते बिलासपुर विधायक शैलेश पांडेय भी बंद की गई ट्रेनों को पुनःसे शुरू करने की मांग को लेकर रेलवे महाप्रबंधक आलोक जैन के पास पहुच गए..बिलासपुर विधायक ने रेलवे-महाप्रबंधक से दो टूक शब्दों में कहा कि ट्रेनों के पुनः से परिचालन होने पर जनता के साथ उग्र आंदोलन किया जाएगा..मुंगेली में बिलासपुर सांसद अरुण साव ने भी कांग्रेस-नेताओं के द्वारा ट्रेनों के बारे में उठाई जा रही आवाज के बाद लोकसभा में कई बार आवाज उठाए जाने की बात कही..वो अलग बात है..कि बिलासपुर-सांसद के द्वारा उठाई गई आवाज रेलमंत्री व रेलवे-बोर्ड के कानों तक नही पहुच पाई है..कई बार बिलासपुर-सांसद ने रेलमंत्री के साथ मुलाकात की फ़ोटो सोशल-मीडिया में पोस्ट भी की गई थी..इस बात पर कोई शक व शुभह नही सांसद-महोदय की आवाज काफी बुलंद हैं,लोकसभा की कार्यवाही के दौरान देखी जा सकती है..हो सकता है रेलमंत्री-व-रेलवे बोर्ड को ऊंचा सुनने की आदत हो या फिर कोरोना-संक्रमण कॉल में बार बार कोविड-पॉजिटिव आने के बाद श्रवण-शक्ति कम हो गई हो-?शाम होते-होते ट्रेनों से जुड़े मामलों पर राजनीतिक-बयानों के साथ अन्य जनप्रतिनिधियों के भी बयान आने लगेंगे।

मुख्यमंत्री-जी व जिले के प्रभारी-राजस्व-मंत्री जी करगीरोड-सहित छोटे-स्टेशनों की आवाज भी न दबे

ट्रेनों को लेकर रेलवे प्रबंधन के खिलाफ राजधानी-रायपुर न्यायधानी-बिलासपुर सहित उर्जा नगरी-कोरबा की आवाज बुलंद करने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर राजस्व-मंत्री के साथ-साथ विधायक-जनप्रतिनिधियों को उन छोटे-छोटे स्टेशनों की आवाज भी बुलंद करने की आवश्यकता है..जहा कोविड-संक्रमण कॉल का बहाना बनाकर रेलवे-बोर्ड रेलवे-प्रबंधन के द्वारा पैसेंजर-एक्सप्रेस ट्रेनों की परिचालन बंद कर दिया गया है..पिछले 02-सालों से संक्रमण-कॉल का बहाना बनाकर मार्च-2020 से करगीरोड-स्टेशन में पूर्व में रुकने वाली एक्सप्रेस-पैसेंजर का परिचालन बंद कर दिया गया जो की वर्तमान में बदस्तूर जारी है..कोविड-के संक्रमण कम हो जाने के बाद नगर-संघर्ष-समिति कोटा के द्वारा ट्रेनों के पुनः से स्टॉपेज को लेकर सितंबर-2021 में आवेदन-ज्ञापन सौंप जाने के बाद 19-सितंबर-2021 को रेल-रोको आंदोलन किया गया..आंदोलन से हड़बड़ाए रेलवे-प्रबंधन द्वारा आश्वासन का झुनझुना थमा दिया..29-सितंबर को सांसद-विधायक की उपस्थिति में बिलासपुर महाप्रबंधक-व-डीआरएम रेलवे को पुनः से ज्ञापन सौंपा गया..पुनः से आश्वासन का लॉलीपॉप थमा दिया गया..30-नवंबर-2021 में एक बार पुनः से नगर संघर्ष-समिति से जुड़े एक सदस्य के द्वारा भूख हड़ताल पर बैठने के बाद रेल-आंदोलन में तेजी आई..स्टेशन परिसर के बाहर लगातार 13-दिसंबर तक नगर संघर्ष समिति से जुड़े सभी संगठनो ने सांकेतिक-धरना प्रदर्शन जारी रखा..14-दिसंबर को एक बार पुनः से नगर-संघर्ष-समिति में शामिल कोटा-नगर के सभी संगठनो ने ट्रेनों के स्टॉपेज होने तक करगीरोड-स्टेशन से मालगाड़ी में लोडिंग-अनलोडिंग बंद की मांग को लेकर रेल रोको आंदोलन किया। देश 1947-मे आजाद हो चुका है..पर रेलवे में अभी भी अंग्रेजी-कानून का साया हावी है..रेलवे-बोर्ड व रेलवे-प्रबंधन आज भी आम-भारतीयों को अंग्रेजी-कानून से डराने का कार्य कर रही है..14-दिसंबर को आंदोलन खत्म के कुछ दिनों के बाद रेलवे के द्वारा आंदोलनकारियो को समंस भेजा गया…ढाई हजार से ऊपर आंदोलन-कारियो में केवल 08-लोगो के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया वो भी शांतिपूर्ण-तरीके से किए गए आंदोलन पर आंदोलन में यूपी-बिहार की तरह न ही स्टेशनों में तोड़फोड़ की गई-? न ही रेल-इंजन या फिर बोगियों को फूंका गया-? न ही पटरियों को कोई नुकसान पहुचाया गया-? उस समय रेलमंत्री ने कोई कार्यवाही नही किए जाने की बात कही थी यूपी-बिहार के छात्रों को अपना भाई बताया था-?नगर संघर्ष समिति के आंदोलन-कारियो के द्वारा किसी भी प्रकार से रेलवे की संपत्ति को नुकसान नही पहुचाया गया..बावजूद रेलवे-बोर्ड-रेलवे प्रबंधन ने 01-लाख से ऊपर जुर्माने की रकम का ताम्रपत्र भेज दिया..अपनी बुनियादी-जायज मांगो को लेकर नगर-संघर्ष-समिति में शामिल आंदोलनकारी ने आंदोलन किया। रेलवे-प्रबंधन ने बताने में देरी की होगी पिछले 02-सालों से ट्रेनों के स्टापेज नही होने से कोटा नगर व आसपास के इलाके के रहने वाले लोग हजारों युवा-बेरोजगार हो गए-?आवागमन बाधित होने से दूरदराज-आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों की पढ़ाई छूट गई-?व्यपार कोटा नगर का खत्म हो गया-?रोजगार के लिए बिलासपुर व्यपार बिहार जाने वाला नगर का युवा सड़क मार्ग से आवागमन करने के दौरान दुर्घटना का शिकार होकर अपने हाथ पैर तुड़वाकर घर बैठा हुआ है-? ट्रेनों का ठहराव रेलवे बंद करें-?पैसेंजर ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन बनाकर भारी-भरकम राशि रेलवे वसूले-?बावजूद जुर्माने की रकम आंदोलन-कारियो से चाहिए-?कायदे से तो पिछले 02-वर्षों से ट्रेनों के ठहराव नही होने से कोटा-नगर के लोगों को होने वाले नुकसान की भरपाई रेलवे-प्रबंधन को करना चाहिए—पर रेलवे को बोले कौन-? कौन सुनने वाला है-? मीडिया से जुड़े पत्रकार गण कलम चलाए जा रहे हैं..चलाए जा रहे हैं….पर न तो रेलवे-प्रबंधन संज्ञान ले रहा है-?और ना ही कोटा-विधानसभा-संसदीय-क्षेत्र के सांसद-विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि-गण-?

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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