ApnaCg @संत रविदास ने समाज को एक नई दिशा देने का काम किया : विधायक आशीष छाबड़ा

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विनय सिंह@बेमेतरा – बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ब्लाक बेरला के ग्राम पीपरोलडीह में आयोजित संत शिरोमणि रविदास जयंती समारोह में मुख्यअतिथी आशीष छाबड़ा विधायक बेमेतरा हुए शामिल … सर्वप्रथम संत शिरोमणी रविदास जी की तैचित्र में माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिए.. इस अवसर पर विधायक आशीष छाबड़ा जनमानस को संबोधित करते हुए कहा की आज बढ़ा हर्ष का विषय है ग्राम पिपरोलडीह में समस्त मेहर समाज द्वारा संत शिरोमणि रविदास जी 645 वा जयंती समारोह का भव्य आयोजन रखा गया है,हमारा देश साधू-संतों और ऋषि-मुनियों की धरती है यहां अनेक महान संतों ने जन्म लेकर भारतभूमि को धन्य किया है। इन्‍हीं में से एक नाम महान संत रविदास जी का है। संत रविदास बहुत ही सरल हृदय के थे और दुनिया का आडंबर छोड़कर हृदय की पवित्रता पर बल देते थे संत रविदास ने देश में फैले ऊंच-नीच के भेदभाव और जाति-पात की बुराईयों को दूर करते हुए भक्ति भावना से पूरे समाज को एकता के सूत्र में बाधने का काम किया था,संत रविदास ऐसे महापुरुष थे, जिन्होंने समाज को नई दिशा के साथ-साथ नई सोच भी दी,उनके द्वारा बनाए गए दोहों व पदों से आमजन मानस का उद्धार हुआ है, संत रविदास जी कहते है
हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस। ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास अर्थात हरी के समान कीमती हीरे को छोड़कर अन्य की आशा करने वाले अवश्य नरक को जाएंगे। यानी प्रभु की भक्ति को छोड़कर इधर-उधर भटकना व्यर्थ है उनके द्वारा बनाए गए दोहों व पद लोगों को सीख प्रदान करते थे। उन्होंने अपने मन, कर्म व वचनों से समाज में फैली हुई कुरीतियों को दूर करने का कार्य किया। उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि धर्म के नाम पर झगड़ा करना व्यर्थ है। इसलिए हमें उनके जीवन से प्ररेणा लेनी चाहिए और उनके आदर्शों पर चलना चाहिए,संत रविदास की मशहूर कहावत ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ को ज्यादातर लोगों को बोलते हुए सुना होगा. इस कहावत का अर्थ है अगर व्यक्ति का मन शुद्ध है, किसी काम को करने की उसकी नीयत अच्छी है तो उसका हर कार्य गंगा के समान पवित्र है. दरअसल इस कहावत का जन्म उस समय हुआ जब एक बार संत रविदास के कुछ विद्यार्थी और अनुयायी ने पवित्र नदी गंगा में स्नान के लिये पूछा तो उन्होंने ये कह कर मना किया कि उन्होंने पहले से ही अपने एक ग्राहक को जूता देने का वादा कर दिया है तो अब वही उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. रविदास जी के एक विद्यार्थी ने उनसे दुबारा निवेदन किया तब उन्होंने कहा उनका मानना है कि “मन चंगा तो कठौती में गंगा” मतलब शरीर को आत्मा से पवित्र होने की जरुरत है ना कि किसी पवित्र नदी में नहाने से, अगर हमारी आत्मा और हृदय शुद्ध है तो हम पूरी तरह से पवित्र है चाहे हम घर में ही क्यों न नहाये. समाज के मांग अनुरूप विधायक आशीष छाबड़ा ने मेहर समाज सामुदायिक भवन हेतु 05 लाख रुपए की घोषणा इस अवसर पर विजय पारख, मौजीराम साहू,श्रीमती हुरादेवलाल वर्मा अध्यक्ष जनपद पंचायत बेरला,नवाज खान उपाध्यक्ष जनपद पंचायत बेरला, प्रवीण शर्मा पूर्व सरपंच,मिथलेश वर्मा उपाध्यक्ष जनपद पंचायत बेमेतरा,तखतराम साहू,श्रीमती धनेस्वरी चंदेल सरपंच,गणेश सिवारे जिला अध्यक्ष,इदरचंद जैन, बसंत जोशी, भावसिंह राज,संतोष साहू,अविनाश साहू,बिरेंद्र पाठक, मनहरण पाठक,देवशरण गोस्वामी,निलेश वर्मा,शिव कुमार शिवारे,मोहन लहरे,मोहित पाठक,विमल कर्माकर,पूनाराम मिझा,दुर्गा सिवारे सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी रहे उपस्थित,

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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