ApnaCg @सट्टा बाले बाबा “श्री” “श्री” 508 “श्री” उर्फ छत्तीसगढ़ का “कुख्यात लुटेरा मेहमूद गजनवी” ने राजनांदगांव लोकसभा सीट से सांसद बनने का बुन लिया हैं ताना _बाना..

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अक्षय लहरे 8319900214

रायपुर@अपना छत्तीसगढ़ । आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों की तैयारियां चल रही हैं।सीटों के बंटवारे को लेकर उठापटक जारी है।कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शुक्रवार को उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। इस सूची में 39 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया गया। सूची के मुताबिक, वायनाड से राहुल गांधी, राजनंदगांव से सट्टा बाले बाबा भूपेश बघेल, दुर्ग से राजेंद्र साहू, रायपुर से विकास उपाध्याय चुनाव लड़ेंगे।तो वन्ही दूसरी ओर छत्तीसगढ़ का मोहम्मद गजनवी सुर्खियों में, कुख्यात लुटेरा राजनांदगांव लोकसभा सीट से सांसद बनने का बुनने लिया है ताना-बाना?बताते चले कि छत्तीसगढ़ में चुनावी बयार बहने लगी हैं। बीजेपी के सभी 11 सीटों पर,उम्मीदवार ताल ठोक कर मैदान में उतर गए हैं। जबकि कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नही खोले हैं, बावजूद इसके राजनांदगांव सीट से पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। चर्चा है कि राज्य की जनता की आंखों में धूल झोंकने का सपना संजो कर वे अब सांसद बनना चाहते हैं। बताते हैं कि यदि उनका विरोध नही हुआ तो राजनांदगांव लोकसभा सीट से वे अपना भाग्य आजमाने की तैयारी में जुटे हैं। छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव की अधिकतम सीटें हासिल करना कांग्रेस का लक्ष्य है, लेकिन योग्य उम्मीदवार पार्टी को ढूंढे नही मिल रहे हैं।


ऐसे में विधान सभा चुनाव में जय-पराजय का सामना कर चुके उम्मीदवारों को ही एक बार फिर बीजेपी के आगे परोसने की कवायत जोरों पर है। सूत्रों के मुताबिक भू-पे बघेल के काले कारनामों के चलते ज्यादातर प्रत्याशियों ने चुनाव में खड़े होने से इंकार कर दिया है। उनका मानना है कि हार तय है।उनके मुताबिक पूर्ववर्ती भू-पे सरकार ने भ्रष्टाचार का जो नंगा नाच कर पार्टी की छवि पर कड़ा प्रहार किया है, वो जनता को भूले नही भूलता। वे बताते हैं कि बीते 5 सालों में भू-पे सरकार का प्रदर्शन देख कर कई निष्ठावान कांग्रेसियों ने पार्टी की विचारधारा से ही खुद को अलग कर लिया है। ऐसे में संगठन के भीतर भू-पे को राजनांदगांव सीट से चुनाव लड़ाने को लेकर खलबली मच गई है।

चर्चा है कि कई निष्ठावान कार्यकर्त्ता अभी से दावा करने लगे हैं कि राज्य में भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके भू-पे की अगुवाई में यदि लोकसभा चुनाव हुए तो पार्टी को फिर बड़ा खामियाजा उठाना पड़ेगा। उनका मानना है कि मोदी गारंटी और सिर्फ एक भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक बार फिर वोटिंग होगी। ऐसे में भू-पे को चुनावी मैदान में उतारने से पूरी 11 सीटों पर प्रभाव पड़ेगा। बताते हैं कि रायपुर ससंदीय सीट में बीजेपी प्रत्याशी बृजमोहन अग्रवाल के सामने चुनावी जंग के लिए कोई भी योग्य उम्मीदवार हामी नही भर रहा है। कहते हैं कि पार्टी द्वारा मोटा चुनावी फंड उपलब्ध कराने के आश्वासन के बावजूद संशय की स्थिती है, कांग्रेस को उम्मीदवार ढूंढे नही मिल रहे हैं। रायपुर में बड़ी मुश्किल से पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने हामी भरी है।

यही हाल दुर्ग,बिलासपुर,महासमुंद, रायगढ़,अंबिकापुर, और चांपा-जांजगीर लोकसभा सीट का बताया जाता है। यह भी बताते हैं कि बस्तर में फिर कांग्रेस का सुपड़ा साफ होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक बस्तर के बजाए कांकेर संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के लिए पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बेटे को आगे कर दिया गया है। इस इलाके के कई वरिष्ठ कांग्रेसी दावा करते हैं कि बीते 5 सालों में सिर्फ लखमा पिता-पुत्र ही पार्टी से लाभांवित हुए हैं। उन्होंने ही सत्ता का स्वाद चखा है।भू-पे राज में आदिवासियों के साथ छलावा किया गया था, ऐसे में योग्य आदिवासी नेता कांग्रेस पर भरोसा जताने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं।


राजनीति के जानकार बताते हैं कि भू-पे राज में गोबर, गौधन न्याय योजना में 2000 हजार करोड़ का घोटाला, राजीव मितान क्लब में 200 करोड़ का घोटाला,2200 करोड़ का शराब घोटाला,5000 हजार करोड़ का चांवल घोटाला,3000 करोड़ का कस्टम राइस मिलिंग घोटाला,6 हजार करोड़ का महादेव ऐप घोटाला,600 करोड़ का कोल खनन परिवहन घोटाला,5000 करोड़ का दवा घोटाला,5000 करोड़ का आदिवासी कल्याण विभाग और महिला बाल विकास विभाग में घोटाला, पीएससी घोटाला,5000 हजार करोड़ का वन विभाग के कैंपा फंड में घोटाला, माइनिंग घोटाला,2000 करोड़ का DMF फंड घोटाला,20000 करोड़ का जल-जीवन मिशन घोटाला,2000 करोड़ का विवेक ढांड द्वारा समाज कल्याण विभाग घोटाला और राज्य की जनता के साथ धोखाधड़ी जैसे कई गंभीर आरोप पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे पर हैं।


IT-ED जैसी बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसियां भू-पे सरकार के काले कारनामों की जांच में जुटी है। ये एजेंसियां करोड़ों का काला धन जब्त कर रही है। कई अधिकारी और नेता जांच के घेरे में है।छत्तीसगढ़ में बीते 5 सालों में भू-पे सरकार ने सरकारी तिजोरी को जिस तरह से लुटा है, उससे अक्रांता मोहम्मद गजनवी की यादें तरुणताजा हो जाती हैं। छत्तीसगढ़ महतारी के इस प्रदेश और सोमनाथ की गरिमा एक जैसी बताई जाती है।

कई साधु संत इसकी महिमा वर्णित करते हैं। ऐसी पावन धरा ,इस कौशल प्रदेश को जिस किसी नेता ने अपनी कुर्सी का रौब दिखाकर भय और आतंक का राज स्थापित किया, जनता ने उसे तगड़ा जवाब दिया है। ऐसे लुटेरे शासकों को कुर्सी से उतार फैंका गया है। बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे की गति भी यही हुई है। पार्टी के कई समर्पित नेता हालिया विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की हार का ठीकरा सिर्फ भू-पे पर फोड़ रहे हैं।


आम कार्यकर्त्ता बताते हैं कि भू-पे राज में घोटालेबाज अनिल टुटेजा, विवेक ढांड, वन विभाग का कैंपा राव, सौम्या चौरसिया, कुख्यात IPS शेख आरिफ, और आनंद छाबड़ा, की ही तूती बोलती थी। उनके मुताबिक पार्टी के खर्चों के अलावा चुनावी मुद्दे और अपराधों को यही लोग तय किया करते थे।भू-पे के जोर जबरदस्ती समर्थन के लिए विधायकों को रायपुर और दिल्ली में पकड़ के रखना, लाना ले जाना और लालच देना जैसी गतिविधियों को यही चंडाल चौकड़ी अंजाम दिया करती थी।





वे तो सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, आतंक इतना था।उनका मानना है कि काले कारोबार में मुख्यमंत्री कार्यालय के भी शामिल हो जाने से पूरे 5 बरस तक जन कल्याणकारी कार्य के बजाए घोटाले ही घोटाले हुए थे। भू-पे के सरकारी भ्रष्टाचार को जनता अभी नही भूली है। ऐसे में भू-पे बघेल को लोकसभा चुनाव में आगे कर देने से जनता का आक्रोश कांग्रेस के प्रति और बढ़ेगा, भड़केगा,अंदेशा यही जाहिर किया जा रहा है। फिलहाल राजनैतिक गलियारों में छत्तीसगढ़ के मोहम्मद गजनवी को लेकर चर्चाओं का दौर छिड़ गया है।

*ईडी को इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी मिले,सट्टेबाजी एप घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल से होगी जल्द पूछताछ*

छत्तीसगढ़ के साथ पूरे देश को हिला देने वाले महादेव सट्टा एप मामले में ED ने अपनी दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का भी नाम है। चार्जशीट में 5 आरोपितों शुभम सोनी, अमित कुमार अग्रवाल, रोहित गुलाटी, भीम सिंह और असीम दास के नाम हैं। इस चार्जशीट में भूपेश बघेल को पैसे देने की बात कही गई है। यही नहीं, ईडी ने बताया है कि भूपेश बघेल के खिलाफ उसे इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस भी मिले हैं।
ऐसे में माना जा रहा है कि ईडी जल्द ही उनसे पूछताछ कर सकती है। इस बीच, भूपेश बघेल ने अपनी सफाई में कहा है कि राजनीतिक वजहों से उनका नाम इस मामले में घसीटा जा रहा है।

*ईडी की चार्जशीट में क्या कुछ है?*

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने 1700-1800 पन्नों की नई चार्जशीट में असीम दास को महादेव सट्टा एप के प्रोमोटरों का कूरियर कहा है। उसी के ठिकाने से रेड मारकर ईडी ने 5.39 करोड़ रुपए बरामद किए थे। इसके साथ ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। ईडी ने चार्जशीट में कहा है कि असीम दास ने ये बात स्वीकार किया है कि उसके पास से बरामद पैसे भूपेश बघेल के लिए भेजे गए थे। उसने पहले भी ये बात स्वीकारी है कि महादेव सट्टा एप के संचालकों ने भूपेश बघेल को कुल 508 करोड़ रुपए दिए थे।

*जल्द भेजा जा सकता है समन*

बताते चले कि महादेव सट्टा ऐप मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल भी फंसते नजर आ रहे हैं।उनके नाम का जिक्र तो पहले भी आरोपी ने किया था।अब चार्जशीट में भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम शामिल किया गया है।अब उनको जल्द ही समन भेजा जा सकता है। आरोपी असीम दास का दावा है कि  घोटाले का पैसा चुनाव के दौरान बघेल को भेजा गया था।उधर मुंबई से इस केस में पहली गिरफ़्तारी हो गई है।




*भूपेश बघेल को 508 करोड़ देने का दावा*

महादेव बेटिंग ऐप केस में आरोपी असीम दास के अपने बयान में बघेल का नाम लिया।उसने बताया कि बघेल को चुनाव के दौरान महादेव ऐप प्रोमोटर्स की ओर से 508 करोड़ रुपये दिए गए थे।बता दें कि आरोपी असीम दास के ठिकाने से ED ने 5 करोड़ 39 लाख रुपये बरामद किए गए थे।ED की तरफ से दाखिल चार्जशीट में असीम दास के अलावा शुभम सोनी, अमित अग्रवाल, रोहित गुलाटी, भीम सिंह के भी नाम दर्ज हैं।

*ईडी की ,700-1,800 पन्नों की नई चार्जशीट*

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक करीब 1,700-1,800 पन्नों की नई चार्जशीट एक जनवरी को दायर की गई थी, जिसमें पांच लोगों को आरोपी के रूप में नामित किया गया है।इनमें कथित कैश कूरियर असीम दास, पुलिस कांस्टेबल भीम सिंह यादव, ऐप से जुड़े एक प्रमुख कार्यकारी शुभम सोनी और अन्य शामिल हैं। ईडी के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत द्वारा 10 जनवरी को आरोपपत्र पर संज्ञान लेने की उम्मीद है।बता दें कि ऐप के कथित मालिक सोनी ने पहले एक वीडियो बयान और ईडी को एक हलफनामा भेज कर दावा किया था कि ऐप को बिना कानूनी कार्रवाई अपना अवैध कारोबार करने की अनुमति देने के लिए नेताओं और उनसे जुड़े व्यक्तियों को दी गई रिश्वत के ‘सबूत’ हैं।एजेंसी ने रायपुर में विशेष पीएमएलए अदालत के सामने दायर अपने पहले आरोप पत्र में चंद्राकर और उप्पल के साथ कुछ अन्य लोगों को भी नामित किया था।

*शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य घोटाला, चावल घोटाला,खदान घोटाला… छत्तीसगढ़ में हुआ कांग्रेस का हिसाब-किताब?*





बताते चले की छत्तीसगढ़ राज्य में पूर्व की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार पर घोटालों पर घोटालों को अंजाम देने के आरोप हैं, ऐसे में जनता कांग्रेस से खफा नजर आ रही थी। निवर्तमान भूपेश बघेल सरकार पर शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य बनाने के नाम पर घोटाला, चावल घोटाला, खदान से जुड़े माल ढुलाई के काम में घोटाला के साथ ही महादेव बेटिंग ऐप जैसे घोटालों की लंबी फेहरिस्त है।भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंंत्री बनाया गया था, तो ऐसी रिपोर्ट्स थी कि उन्हें 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है, अगले ढाई साल टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री होंगे। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ। भूपेश बघेल तमाम गतिरोधों के बावजूद पूरे 5 साल मुख्यमंत्री बने रहे। टीएस सिंहदेव को आखिरी कुछ महीनों के लिए उपमुख्यमंत्री बनाकर चुप करा दिया गया। ऐसा टीएस सिंहदेव ने क्यों होने दिया, ये तो वही लोग जानें, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो भूपेश बघेल ने खुद को मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत की।
उन पर भारतीय जनता पार्टी आरोप लगाती है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ को कांग्रेस पार्टी के लिए तिजोरी के तौर पर इस्तेमाल कराया। जिन चीजों का वादा करके वो सत्ता में आए थे, किया उसके ठीक विपरीत काम और घोटालों पर घोटालों को अंजाम दिया। कांग्रेस पार्टी के लिए फंडिंग की और खुद को सत्ता में बनाए रखा। हम इस लेख में भूपेश बघेल सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की लंबी सूची प्रकाशित कर रहे हैं, जिसके बाद सारी बातें दूध और पानी की तरह स्पष्ट हो जाएंगी।

*महादेव सट्टेबाजी घोटाला*

भारतीय जनता पार्टी आरोप लगा रही है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सीधे तौर पर इस घोटाले में शामिल हैं। इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड और एप के मालिक ने अपना एक वीडियो जारी कर कहा कि उसने भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए नकद पहुँचाए हैं। ये पैसे चुनाव में इस्तेमाल किए गए हैं। उसने बताया कि एक-एक पैसों का हिसाब उसके पास है। बता दें कि महादेव सट्टेबाजी एप मामला 15000 करोड़ का अभी तो ज्ञात है, जाँच जारी है। इतने पैसों की ती मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है, जिसपर ईडी ने केस दर्ज किया है। अभी ये कितना बड़ा घोटाला है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इस मामले में भूपेश बघेल के करीबी लोग जेल में बंद हैं।इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाकायदा चुनावी सभा में भूपेश बघेल से सवाल पूछा है कि वो बताएँ कि इन पैसों को उन्होंने कहाँ इस्तेमाल किया। पीएम मोदी ने पूछा, “मैं कांग्रेस से कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ। महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाला 508 करोड़ रुपए का है और जाँच एजेंसियों ने इस मामले में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की है। छत्तीसगढ़ के निवर्तमान सीएम का एक करीबी सहयोगी भी जेल में है। कांग्रेस को खुलासा करना चाहिए इसमें सीएम को कितना पैसा मिला? दिल्ली दरबार कितना पैसा पहुँचा?”

*छत्तीसगढ़ पीसीएस घोटाला*

इस घोटाले से जुड़ी हैरान करने वाली जानकारियाँ सामने आई है। छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन में नेताओं और अधिकारियों को बच्चों को सीधे एंट्री मिली, और उन्हें बड़े-बड़े पद भी दिए गए। प्रधानमंत्री ने भी इस घोटाले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस के गणितबाजों से सवाल PSC घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के युवाओं का भी है… जिन हजारों युवाओं ने दिन-रात पढ़ाई करके, परीक्षा पास की थी, उनको किस फॉर्मूले से बाहर निकाला गया? कॉन्ग्रेस नेताओं के बच्चों को गणित के किस फॉर्मूले से भर्ती किया गया?

2000 करोड़ का शराब घोटाला

भूपेश बघेल ने वादा किया था कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आएगी तो छत्तीसगढ़ में शराबबंदी करेगी। उल्टा भूपेश बघेल और उनके बेटे पर आरोप है कि उन्होंने कमीशनखोरी करके 2161 करोड़ रुपए का घोटाला किया जबकि अभी इसकी पूरी डिटेल भी सामने नहीं आई है। जो पकड़ा गया और जिसकी रिकवरी हुई है, यह उसकी जानकारी है। सच्चाई यह है कि छत्तीसगढ़ में हजारों करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है। इस मामले में ईडी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और बताया है कि एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के जरिए आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ।ज्ञात हो कि मई 2023 में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में 2,000 करोड़ रुपये के ‘घोटाले’ का भंडाफोड़ किया, जिसके बारे में माना जाता है कि यह शीर्ष राजनेताओं और नौकरशाहों की मदद से संचालित किया गया था। ईडी ने एक मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया, जिसे रायपुर की एक अदालत ने ईडी की हिरासत में भेज दिया। अनवर ढेबर कांग्रेस नेता और रायपुर के मेयर ऐजाज़ ढेबर के भाई हैं। गौरतलब है कि ईडी की जांच में इस रैकेट में शामिल पूरे सिंडिकेट का खुलासा हुआ था। ‘पीएमएलए जांच से पता चला कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। अनवर ढेबर, एक निजी नागरिक होते हुए भी,उच्च-स्तरीय राजनीतिक अधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों की अवैध संतुष्टि के लिए समर्थित और काम करता था।

सिंडिकेट कैसे संचालित होता था?

प्रत्येक खरीदी गई नकदी के लिए सिंडिकेट द्वारा आपूर्तिकर्ताओं से प्रति केस 75-150 रुपये (शराब के प्रकार के आधार पर) का कमीशन सावधानीपूर्वक वसूला जाता था।ढेबर ऐसे किसी भी नियम का पालन नहीं कर रहे थे और एक निजी संस्था की तरह चल रहे थे। “राजनीतिक अधिकारियों के समर्थन से, अनवर ढेबर सीएसएमसीएल के एक सक्षम आयुक्त और एमडी पाने में कामयाब रहे, और सिस्टम को पूरी तरह से अपने अधीन बनाने के लिए विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह जैसे करीबी सहयोगियों को काम पर रखा। उन्होंने शराब व्यापार की पूरी श्रृंखला को नियंत्रित किया। ढेबर ने अन्य लोगों के साथ साजिश करके बेहिसाब देशी कच्ची शराब का निर्माण कराना शुरू कर दिया और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचना शुरू कर दिया। इस तरह, वे राज्य के खजाने में कुछ भी जमा किए बिना पूरी बिक्री आय अपने पास रख सकते थे। डुप्लिकेट होलोग्राम उपलब्ध कराए गए. डुप्लीकेट बोतलें नकद में खरीदी गईं, और शराब को राज्य के गोदामों से गुजरते हुए डिस्टिलर से सीधे दुकानों तक पहुंचाया गया।यह एक वार्षिक कमीशन था जिसका भुगतान मुख्य डिस्टिलर्स द्वारा डिस्टिलरी लाइसेंस प्राप्त करने और सीएसएमसीएल की बाजार खरीद में एक निश्चित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था। विदेशी शराब आपूर्तिकर्ताओं से भी FL-10A लाइसेंस धारकों से कमीशन वसूला जाता था। ये लाइसेंस अनवर ढेबर के सहयोगियों को दिए गए थे।

चावल घोटाला?

छत्तीसगढ़ की निवर्तमान कांग्रेस सरकार पर सरकारी राशन के बँटवारे में भी घोटाले का आरोप लगा है। पीडीएस व्यवस्था के तहत प्रति व्यक्ति 5 किलो धान देने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कैग रिपोर्ट में आया है कि इसमें 600 करोड़ रुपए की गड़बड़ी की गई है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भूपेश बघेल सरकार ने लगभग 5000 करोड़ रुपये का चावल घोटाला किया है। मई माह में भाजपा ने भूपेश बघेल पर 5000 करोड़ के चावल घोटाले का आरोप लगाते हुए इस्तीफा भी माँगा था। इस मामले में भूपेश बघेल और उनसे जुड़े लोगों ने चुप्पी साधे रखी है।

खदान ढुलाई घोटाला?

निवर्तमान भूपेश बघेल सरकार ने खदानों से निकलने वाले माल पर भी घोटाला किया है। माल ढुलाई से जुड़ा 2000 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप उस पर है। बताया जा रहा है कि 25 रुपए प्रति टन की वसूली की गई है। पिछले साल ईडी ने इस मामले में जाँच शुरू की थी और कई लोग इस मामले में भी गिरफ्तार हुए हैं। ईडी ने एक बयान में कहा कि यह मामला एक बड़े घोटाले से संबंधित है, जिसमें छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़ा एक समूह ढुलाई किये जाने वाले प्रति टन कोयले पर अवैध रूप से 25 रुपये का कर वसूल रहा है। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 2-3 करोड़ रुपये अर्जित किए जाते हैं।

गोबर और गोठान घोटाला

मजे की बात ऐ है कि छत्तीसगढ़ की निवर्तमान भूपेश बघेल सरकार ने घोटाला करने मे गोठान और गोबर को भी नहीं छोड़ा था 1300 करोड़ रुपये का गोठान एवं गोबर घोटाला किया। इस मामले में भाजपा ने भी काफी हमला बोला है, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले को उठा चुके हैं। गौ धन के नाम पर इतना बड़ा घोटाला छत्तीसगढ़ में अंजाम दे दिया गया।

क्या छत्तीसगढ़ में दो बैल 1800 किलो गोबर करते हैं?

निवर्तमान कांग्रेस सरकार में सिर्फ भ्रष्टाचार किया जा रहा था। ”हाल ऐसा है कि राज्य में 2 बैल एक दिन में 1800 किलो गोबर दे देते हैं।भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ को लूट का बाजार बना दिया था।इस सरकार में वादे खूब किए जा रहे हैं, लेकिन गरीबों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया हैं। दरअसल मामला 26 नवंबर का  है।कोटा जनपद पंचायत के खैरा ग्राम के दो बैल वाले एक किसान ने गोठान में एक हफ्ते में 12800 रुपए का गोबर बेच दिया, भुपेश सरकार गौ पालकों से 1.5 रुपए प्रति किलों के हिसाब से गोबर खरीदती है। अगर इस हिसाब से अंदाजा लगाएं तो उस किसान के एक बैल ने रोजाना साढ़े 4 क्विंटल गोबर किया,इस मामले में जांच की बात की जाती रही हैं।

छत्तीसगढ़ में चना सरकारी राशन के वितरण में घोटाला?

केंद्र सरकार के पैसों का सही से उपयोग न करने के आरोप, भाई भतीजावाद के आरोप तो लगते ही रहे हैं, साथ ही आदिवासी इलाकों के साथ सौतेला व्यवहार करने के भी आरोप लगे हैं। भूपेश बघेल पर आरोप हैं कि वो छत्तीसगढ़ से मिले घोटालों के पैसों को कांग्रेस की टॉप लीडरशिप तक पहुँचाते हैं और अन्य राज्यों के चुनावी अभियान में भी खर्च करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि वो पूरे 5 साल तक अपनी सत्ता बचाने में सफल रहे हैं।


भष्ट्राचार के आरोप हुए नत्थी

कांग्रेस अपनी सफाई में कुछ भी कहती रहे। कोर्ट में क्या साबित हो पाए या नहीं या वक्त बताएगा लेकिन निवर्तमान कांग्रेस सरकार के ऊपर भष्ट्राचार के आरोप एक तरह से नत्थी हो गए। ऐन चुनाव के वक्त महादेव ऐप के प्रकरण ने भी इस धारणा की पुष्टि की। मुक्तिबोध कहते हैं कि इससे इंकार नहीं कर सकते कि भष्ट्राचार के आरोपों ने कांग्रेस का नुकसान किया। आम वोटर के दिमाग में यह संदेश गया कि यह सरकार किसी ना किसी रूप में भष्ट्राचार के मामलों में शामिल होती दिख रही है। भूपेश अपनी सरकार की एक नीट एंड क्लीन इमेज नहीं बना रख सके।(साभार न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़)

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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