ApnaCg @तापमान 46 डिग्री, धूप में काम करते मजदूर (खाने का तेल 200 रुपए लीटर और मजदूरी 200 से भी कम) ( मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित मजदूरी से कम राशि ही मिल रहा)

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जितेंद्र पाठक@लोरमी(अपना छत्तीसगढ़) – भीषण गर्मी, 44 डिग्री तापमान और धूप में काम करते मजदूर। हर वर्ष मजदूर दिवस जरूर मनाया जाता है लेकिन मजदूरों की सुविधाओं के लिए ध्यान नहीं दिया जाता। आज भी दिहाड़ी मजदूरों को मनरेगा में निर्धारित मजदूरी से कम राशि ही मिल रहा है। बड़े-बड़े इमारत खड़े करने वाले हमारे मजदूर भाई बहन आज भी महंगाई के दौर में न्यूनतम राशि में काम कर रहे हैं। पलायन का दौर भी इसी कारण जारी रहता है।
मजदूर दिवस को हर साल मजदूरों के लिए समर्पित किया जाता है, मगर इसके बाद मजदूरों की स्थिति जस की तस बनी रहती है। लोरमी के फौब्बारा चौक के पास सुबह 7:00 बजे से 10:00 बजे तक मजदूरों की भीड़ लगी रहती है। इनको काम की तलाश रहती है यदि काम मिल गया तो घर में चूल्हा जरूर जलेगा, मगर काम नहीं मिला तो निराश लौटना पड़ता है।

ठेकेदारों के द्वारा मजदूरों को काम पर लाया जाता है और आज भी महिला रेजा मजदूरों को 160 से 170 रुपए एवं पुरुष मजदूर को 200 से 220 रूपए मजदूरी दिया जाता है। जबकि कलेक्टर द्वारा अकुशल मजदूरों के लिए जारी राशि इससे काफी ज्यादा है वहीं मनरेगा में भी इससे ज्यादा भुगतान मजदूरों को दिया जाता है। मजदूर नरेंद्र ने बताया कि वह जब लखनऊ में मजदूरी करने जाता था तब उसे 350 रुपए का भुगतान मिलता था। गौरतलब है कि आज भी छत्तीसगढ़ के बाहर दूसरे राज्यों में मजदूरों का भुगतान ज्यादा है, इसीलिए छत्तीसगढ़ राज्य से हर साल मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं। सरकारी आंकड़ों में निर्धारित मजदूरी का भुगतान लोकल ठेकेदारों द्वारा नहीं किया जाता। रोज काम मिलने की आस के कारण सभी मजदूर ठेकेदारों के साथ न्यूनतम राशि में भी काम करने को मजबूर रहते हैं। वास्तव में मजदूर महंगाई के विरुद्ध मजबूर हैं। इधर मुंगेली जिले में भीषण गर्मी के चलते तापमान 44 डिग्री से ऊपर चल रहा है इसके बावजूद क्षेत्र के सभी मजदूर तेज धूप में भी काम कर इमारत खड़ा कर रहे हैं। नगर के विभिन्न चौक चौराहे में अक्सर काम की तलाश में बैठे मजदूर नजर आ ही जाते हैं। यह अलग बात है कि रोज इन्हें काम मिल पाए या ना मिल पाए।

पलायन जारी है

हर साल मुंगेली जिले से मजदूरों का पलायन जारी रहता है। यहां से मजदूरों को हैदराबाद, लखनऊ, पंजाब, उत्तरप्रदेश, बिहार, जम्मू कश्मीर दिल्ली सहित अन्य राज्यो में भेजा जाता है। मजदूरों को यहां मजदूरी की राशि ज्यादा मिलती है मगर महंगाई के दौर में यह राशि किसी महानगर में कम के ही बराबर है। पिछले 3 साल के भीतर करोना काल के बाद लोरमी-मुंगेली क्षेत्र से हैदराबाद, बनारस सहित आसपास राज्य के लिए बस सेवा भी शुरू हो चुकी है। इन बसों में यात्री के तौर पर मजदूर ही आवागमन कर रहे हैं। दलाल भी सक्रिय हैं और दलाली करके मजदूरों को दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है।

क्या कहना है

छतीसगढ़ राज्य मजदूर व किसानो की सरकार है कोरोना काल मे जहां अन्य राज्यो की सरकार ने मजदूरों को असहाय छोड़ दिया था इस दौरान हमारी छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने पूरी सवेदनशीलता के साथ सभी मजदूरो को उनके गांव लाये व कोरोटाइन सेंटर में रखे सभी को रोजगार गारंटी के तहत कार्य दिए छत्तीसगढ़ राज्य सबसे ज्यादा इस दौरान मनरेगा के तहत कार्य देने में पहला राज्य रहा।

सागर सिंह बैस अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी मुंगेली

छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जिसमें कृषिहीन मजदूर परिवार को प्रति वर्ष राशि दिया जाएगा साथ ही सरकार की एक नई योजना के तहत मजदूर परिवार को 20-20 हजार रुपये जो बेटियों के शादी, शिक्षा व रोजगार के लिए दिए जाएंगे।

खुशबूआदित्य वैष्णव उपाध्यक्ष जनपद पंचायत लोरमी

लोकल मजदूरों को कलेक्टर दर पर भुगतान मिलना चाहिए इस हेतु प्रशासन को सार्थक प्रयास करना चाहिए।

शरद डड़सेना समाजसेवी

आजादी के 75 वर्ष बाद अनेक मजदूर कानून मजदूरों की दशा सुधार नहीं पा रहे हैं, मजदूर देश के आधारभूत संरचना के निर्माण के मजबूत स्तंभ है लेकिन आज भी उन्हें वह सम्मान और सुविधा नहीं मिल पा रही है, छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार की मजदूरों से संबंधित हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है।

रवि शर्मा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य भाजपा किसान मोर्चा

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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