ApnaCg @छुरा क्षेत्र में 10 वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी में लगे छात्र-छात्राओं के लिए मुसीबत बनी अघोषित बिजली कटौती

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मनोज सिंह ठाकुर

गरियाबंद@अपना छत्तीसगढ़ । छुरा क्षेत्र में इन दिनों बड़े पैमाने पर की जा रही अघोषित बिजली कटौती बोर्ड परीक्षा की तैयारी में लगे छात्र-छात्राओं पर भारी पड़ रही है। खासतौर से पढ़ाई, पिसाई, बिजली पर आधारित कामकाज प्रभावित होने से लोगों में बिजली कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश है।छुरा विकास खण्ड और छुरा नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार लंबे समय के लिए विद्युत सप्लाई बंद होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। दिन में कई बार बिना सूचना के बिजली सप्लाई बंद कर दी जाती है। जिससे बच्चों की एकाग्रता भंग होती है, जिसका असर उनके पेपर पर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बिजली कंपनी के अधिकारी अघोषित बिजली कटौती करके आखिर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं। यदि बच्चों के पेपर बिगड़ गए तो डर है कि कही बच्चे डिप्रेशन में जाकर कोई गलत कदम न उठा लें। लोगों ने बताया कि कटौती के कारण सबसे ज्यादा परेशानी चावल की पिसाई में आती है, वहीं व्यापारियों ने कटौती से व्यापार सीधे तौर पर प्रभावित होने की बात कही है। किसानों के खेतों में रवि फसल में सिंचाई नहीं हो पा रही है।

बिजली कटौती होने से कैसे हो परीक्षा की तैयारी?

गौरतलब हो कि अघोषित बिजली कटौती से छुरा क्षेत्र व नगरवासी परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह शाम सहित वेसमय लंबे समय के लिए हो रही बिजली कटौती से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। अभी गर्मी ने ठीक से दस्तक भी नहीं दी है और बिजली की आंख मिचौली शुरू हो गई है। सुबह पांच बजे से करीब आठ बजे तक बिजली कटौती हो रही है। दिन में भी बार-बार ट्रि¨पग से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शाम को भी बिजली कटौती शुरू हो जाती है, जो करीब एक घंटे तक होती है। कभी-कभी रात को भी बिजली काट दी जाती है।  रोजाना करीब आठ से 8 घंटे बिजली कटौती हो रही है। इसका खामियाजा छात्र  छात्राओं सहित क्षेत्र वासियों को भुगतना पड़ रहा है।कक्षा-12 की छात्रा मंजू कहती हैं कि बिजली की समस्या की वजह से परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक नहीं हो पा रही है। रात व सुबह को पढ़ाई के समय अधिकतर बिजली आपूर्ति नहीं होती है। कभी-कभी तो इनवर्टर भी डाउन हो जाता है। ऐसी स्थिति में पढ़ाई करना मुश्किल साबित हो रहा है। कक्षा-10 की छात्रा कुमारी अंजलि ने कहा कि रात को बिजली कटौती होने के कारण दिन में पढ़ाई करनी पड़ रही है। पढ़ाई करने के लिए सुबह उठने पर बिजली गायब मिलती है, जबकि परीक्षाओं की तैयारी के समय अधिक से अधिक बिजली आपूर्ति मिलनी चाहिए। कक्षा-12 के छात्र राम कुमार ध्रुव ने कहा कि अधिकतर छात्र-छात्राएं रात व सुबह को पढ़ाई करते हैं, उस समय बिजली आपूर्ति जरूर होनी चाहिए, जिससे कि परीक्षा की तैयारी के समय कोई दिक्कत न हो। कक्षा-10 के छात्र कृष देवांगन ने कहा कि अघोषित बिजली कटौती से पढ़ाई भी नहीं हो पा रही है, जिससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए विद्युत आपूर्ति दुरुस्त किया जाना बहुत ही जरुरी है।

कुछ हम भी करें बिजली बचाने को पहल

यदि बिजली नहीं होती तो जीवनयापन करना काफी कठिन हो जाता। हमें बिजली के महत्व को समझना होगा। बिजली को बचाया जाए तो उसका लाभ उपभोक्ताओं को ही मिलेगा। बिजली की बचत के लिए कंधे से कंधा मिलाकर आगे कदम बढ़ाना होगा। तभी हमारी आने वाली पीढ़ी बिजली का भरपूर आनंद उठा सकेगी। बिजली बचाने के लिए हमें ही पहल करनी होगी। इसके बाद ही हम दूसरों को बिजली बचाने के लिए प्रेरित कर सकेंगे। बिजली की चोरी भी नहीं करनी चाहिए। बहुत से घरों में लोड ज्यादा होता है लेकिन बिजली का कनेक्शन कम क्षमता का लेते हैं। ऐसा करके बिजली चोरी को बढ़ावा दिया जा रहा है लेकिन यह सही नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को बिजली की खपत के हिसाब से ही कनेक्शन लेना चाहिए और समय पर बिल भी जमा करना चाहिए।

लटकते और जर्जर तार भी कर रहे लाइनलॉस

बिजली की फिजूल खर्च के लिए कहीं न कहीं विद्युत विभाग भी दोषी है। लटकते व जर्जर तारों से भी लाइनलॉस होता है। इसमें बिजली की खपत ज्यादा होती है। अगर इन जर्जर तारों को बदलवा दिया जाए तो लाइनलॉस कम हो जाएगा। ऐसा करने से बिजली की खपत पर भी काफी असर पड़ेगा लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही की वजह से ऐसा नहीं हो पा रहा है।

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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