ApnaCg @केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपनी महाराष्ट्र यात्रा के दूसरे दिन आज पुणे में वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान (VAMNICON) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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यह आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है,75 सालों में कई सरकारें आईं और गईं,मगर किसी ने सहकारिता मंत्रालय बनाने की ज़रूरत नहीं समझी

प्रधानमंत्री श्रीनरेन्द्र मोदी ने इसी वर्ष यह फ़ैसला किया कि सहकारिता एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है और उसे अब एक संपूर्ण मंत्रालय देने की ज़रूरत है और उन्होंने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की

दीक्षांत समारोह में शामिल छात्र-छात्राओं को जीवन के एक नये पड़ाव की शुरुआत पर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी

सहकारिता क्षेत्र में रोज़गार और विकास की अनेक संभावनाएँ हैं,इसमें करियर के लिए पोटेंशियल के साथ ही आत्मसंतोष भी है

सहकारिता के माध्यम से ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और छोटे किसानों को समृद्ध बनाने का काम सिर्फ़ युवा ही कर सकते हैं

तनख़्वाह के साथ ही काम से संतुष्टि भी बहुत ज़रूरी है और यह तभी मिल सकती है जब आप सहकारिता के विस्तार के लिए कार्य करें

भारत के पाँच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में सहकारिता मंत्रालय और सहकारिता आंदोलन की बहुत बड़ी भूमिका होगी

अमूल जैसी सहकारी संस्था देश की 36 लाख बहनों से सुबह शाम दूध एकत्र कर हर साल 52,000 करोड़ रुपये वितरित करती है

आज जब देश दुनिया के सामने आत्मनिर्भर बन कर खड़ा रहना चाहता है तो ऐसे में सहकारिता क्षेत्र की बहुत अधिक प्रासंगिकता है

आत्मनिर्भर का मतलब देश की सभी आवश्यकताओं का देश में ही उत्पादन करने के साथ ही देश के 130 करोड़ लोगों को अपना जीवन यापन करने के लिए आत्मनिर्भर बनाना भी है

130 करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और देश में सम विकास लाने के लिए सहकारिता के अलावा और कोई क्षेत्र नहीं हो सकता

कई कारणों से सहकारिता क्षेत्र धीरे धीरे क्षीण होता जा रहा था लेकिन आज सहकारिता क्षेत्र को फिर से मज़बूत कर उसे देश की जीडीपी में सबसे बड़ा कंट्रीब्यूटर बनाना है

सहकारिता क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अनेक महत्वपूर्ण क़दम उठाए जा रहे हैं

हम मल्टी स्टेट ऑपरेटिव एक्ट को संशोधित कर उसमें जो भी कमियां हैं उन्हें दूर करेंगे,साथ ही प्राइमरी एग्रीकल्चर सोसायटी (PACS)जो कि सहकारिता क्षेत्र की आत्मा है उनका संपूर्ण कंप्यूटरीकरण किया जाएगा

दिल्ली –PACS को डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के साथ,डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंकों को स्टेट कोऑपरेटिव बैंकों के साथ और स्टेट कोऑपरेटिव बैंकों को नाबार्ड (NABARD)से जोड़ा जाएगा और नाबार्ड से लेकर लेकर गाँव तक एक पूरी पारदर्शी एग्रीकल्चर फाइनेंस की व्यवस्था बनायी जाएगी अगर देश के आधे गाँवों में पैक्स स्थापित होते हैं और वे पारदर्शी तरीक़े से चलते हैं तो इस देश के अर्थतंत्र को बहुत अधिक गति मिलेगी और देश के किसानों और ख़ासकर ग़रीब किसानों को अपनी उपज का सीधा फ़ायदा मिलेगा बहुत सारे विभागों में सहकारिता की बहुत सारी योजना पड़ी हुई थीं,आज तक उनका कोई मालिक नहीं था लेकिन अब सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से 23 विभागों में सहकारिता से जुड़ी अनेक योजनाएँ निचले स्तर तक पहुँच रही हैं सहकारिता मंत्रालय ने तय किया है कि ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को उसके खेत और उत्पाद के लिए विश्व स्तर पर वैध प्रमाण पत्र देने के साथ ही एक बहुत बड़ी मार्किट चेन बनाने की भी व्यवस्था करेंताकि किसानों को उनके उत्पाद का और ज़्यादा मूल्य मिल सके और वे उनका निर्यात भी कर सकें देश में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ाने का फ़ैसला लिया है और और अगले 25 साल के लिये एक ऐसी सहकारिता नीति बनानी होगी जिसको लागू किया जा सके सहकारिता मंत्रालय ने इस नीति को बनाने का काम शुरू कर दिया है और कुछ ही समय में मोदी के नेतृत्व में हम देश के सामने एक नई सहकारिता नीति पेश करेंगे जो देश के अंदर कोऑपरेटिव को हर गाँव तक पहुँचाएगी जल्दी ही एक सहकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी जिससे देश भर के अनेक राज्यों के कॉलेज संबद्ध होंगे सहकारिता मंत्रालय ने इस नीति को बनाने का काम शुरू कर दिया है और कुछ ही समय में मोदी जी के नेतृत्व में हम देश के सामने एक नई सहकारिता नीति पेश करेंगे जो देश के अंदर कोऑपरेटिव को हर गाँव तक पहुँचाएगी जल्दी ही एक सहकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी जिससे देश भर के अनेक राज्यों के कॉलेज संबद्ध होंगे सहकारिता शिक्षण संस्थाओं में इस तरीक़े की व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें सब छात्रों का प्लेसमेंट होने के बाद ही डिग्री दी जानी चाहिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता के सामने आज़ादी के अमृत महोत्सव के दो उद्देश्य रखे हैं एक देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले जाने-अंजाने शहीदों को देश याद करना,उन्हें श्रद्धांजलि देना और दूसरा देश भर के युवाओं में एक बार फिर देशभक्ति की  जोत जगाने के साथ ही यह संकल्प लेना कि जब आज़ादी के सौ साल होंगे तब भारत कैसा होगा जब 130 करोड़ लोग संकल्प लेते हैं तो इन संकल्पों का संपुट देश इतने आगे ले जाएगा कि दुनिया की आंखें चौंधिया जाएँगीं हमारे देश में सामूहिक संकल्प की प्रथा ही समाप्त हो गई थी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे आगे बढ़ाया है

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपनी महाराष्ट्र यात्रा के दूसरे दिन आज पुणे में वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान (VAMNICON) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।दीक्षांत समारोह में शामिल छात्र-छात्राओं को जीवन के एक नये पड़ाव की शुरुआत पर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए अमित शाह ने कहा कि आप सब की शिक्षा दीक्षा एक ऐसे शहर में हुई है जो देश का ऐतिहासिक शहर है और पूरे देश में शिक्षा का केंद्र है। पुणे शहर से ही छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वदेश,स्वराज और स्वधर्म का नारा बुलंद किया था। यही नारा बाद में आज़ादी में परिवर्तित हुआ और 1947 में हमारा देश आज़ाद होकर आज हम स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्रीने कहा कि सहकारी संस्थाओं ने इस देश के विकास,आज़ादी के आंदोलन और सम विकास लाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह आज़ादी के 75 साल का वर्ष है,आज़ादीकेअमृतमहोत्सव का वर्ष है।75 सालों में कई सरकारें आईं और गईं,मगर किसी ने सहकारिता मंत्रालय बनाने की ज़रूरत नहीं समझी। इसी वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह फ़ैसला किया कि सहकारिता एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है और उसे अब एक संपूर्ण मंत्रालय देने की ज़रूरत है और उन्होंने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। अमित शाह ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं देश का पहला सहकारिता मंत्री बना हूँ। उन्होंने उपस्थित छात्रों से कहा कि सहकारिता क्षेत्र में रोज़गार और विकास की अनेक संभावनाएँ हैं,इसमें में करियर के लिए पोटेंशियल के साथ ही आत्मसंतोष भी है।श्री शाह ने कहा कि आने वाले दिनों में भारत के पाँच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में सहकारिता मंत्रालय और सहकारिता आंदोलन की बहुत बड़ी भूमिका होगी। उन्होने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र अमूल जैसी सहकारी संस्था देश की 36 लाख बहनों से सुबह शाम दूध एकत्र कर हर साल 52,000 करोड़ रुपये वितरित करती है। देश की अनेक सहकारी संस्थाओं ने सफलता की अनेक नई गाथाएँ रची हैं और अमूल के अलावा इफ़को,कृभको और लिज्जत पापड़ देश की प्रतिष्ठित सहकारी संस्थाएँ हैं।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज जब देश दुनिया के सामने आत्मनिर्भर बन कर खड़ा रहना चाहता है तो ऐसे में सहकारिता क्षेत्र की बहुत अधिक प्रासंगिकता है।आत्मनिर्भर का मतलब देश की सभी आवश्यकताओं का देश में ही उत्पादन करने के साथ ही देश के 130 करोड़ लोगों को अपना जीवन यापन करने के लिए आत्मनिर्भर बनाना भी है। 130 करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और देश में सम विकास लाने के लिए सहकारिता के अलावा और कोई क्षेत्र नहीं हो सकता।उन्होंने कहा कि 130 करोड़ लोगों का समावेशी,सम औरसर्वस्पर्शीय विकास सहकारिता क्षेत्र ही कर सकता है। कई कारणों से सहकारिता क्षेत्र धीरे धीरे क्षीण होता जा रहा था लेकिन आज सहकारिता क्षेत्र को फिर से मज़बूत कर उसे देश की जीडीपी में सबसे बड़ा कंट्रीब्यूटर बनाना है और इसके लिये आप सभी को सहकारिता के क्षेत्र में मन लगाकर काम करना होगा। अमित शाह ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अनेक महत्वपूर्ण क़दम उठाए जा रहे हैं। हम मल्टी स्टेट ऑपरेटिव एक्ट को संशोधित कर उसमें जो भी कमियां हैं उन्हें दूर करेंगे।साथ ही प्राइमरी एग्रीकल्चर सोसायटी (PACS)जो कि सहकारिता क्षेत्र की आत्मा है उनका संपूर्ण कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। PACSको डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के साथ, डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंकों को स्टेट कोऑपरेटिव बैंकों के साथ और स्टेट कोऑपरेटिव बैंकों को नाबार्ड (NABARD)से जोड़ा जाएगा और नाबार्ड से लेकर लेकर गाँव तक एक पूरी पारदर्शी एग्रीकल्चर फाइनेंस की व्यवस्था बनायी जाएगी।उन्होंने कहा कि अगर इस देश के आधे गाँवों में पैक्स स्थापित होते हैं और वे पारदर्शी तरीक़े से चलते हैं तो इस देश के अर्थतंत्र को बहुत अधिक गति मिलेगी और देश के किसानों और ख़ासकर ग़रीब किसानों को अपनी उपज का सीधा फ़ायदा मिलेगा।

अमित शाह ने कहा कि बहुत सारे विभागों में सहकारिता की बहुत सारी योजना पड़ी हुई थीं,आज तक उनका कोई मालिक नहीं था लेकिन अब सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से 23 विभागों में सहकारिता से जुड़ी अनेक योजनाएँ निचले स्तर तक पहुँच रही हैं।उन्होंने कहा कि आज देश में प्राकृतिक खेती के रूप में एक बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है। आज हर कोई चाहता है कि वह आर्गेनिक उत्पाद खाए। बहुत सारे किसानों ने ऑर्गेनिक खेती को अपनाया है,लेकिन उन्हें अपने उत्पाद के सही दाम नहीं मिल पाते हैं क्योंकि भूमि और उत्पादों के सर्टिफिकेशन और मार्केटिंग की व्यवस्था नहीं है। श्री शाह ने कहा कि भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय ने तय किया है कि अमूल के साथ मिलकर ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को उसके खेत और उत्पाद के लिए विश्व स्तर पर वैध प्रमाण पत्र देने के साथ ही एक बहुत बड़ी मार्किट चेन बनाने की भी व्यवस्था करेंताकि किसानों को उनके उत्पाद का और ज़्यादा मूल्य मिल सके और वे उनका निर्यात भी कर सकें। सहकारिता मंत्री ने कहा कि देश में सहकारिता क्षेत्र को बढ़ाने का फ़ैसला लिया है और और अगले 25 साल के लिये एक ऐसी सहकारिता नीति बनानी होगी जिसको लागू किया जा सके। सहकारिता मंत्रालय ने इस नीति को बनाने का काम शुरू कर दिया है और कुछ ही समय में मोदी जी के नेतृत्व में हम देश के सामने एक नई सहकारिता नीति पेश करेंगे जो देश के अंदर कोऑपरेटिव को हर गाँव तक पहुँचाएगी। अमित शाह ने कहा कि जल्दी ही एक सहकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी जिससे देश भर के अनेक राज्यों के कॉलेज संबद्ध होंगे।उन्होंने कहा कि यह एक नेशनल यूनिवर्सिटी होगी जो राज्यों के कॉलेजों को संबद्ध कर सहकारिता क्षेत्र को मज़बूत करेंगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता शिक्षण संस्थाओं में इस तरीक़े की व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें सब छात्रों का प्लेसमेंट होने के बाद ही डिग्री दी जानी चाहिए। श्री शाह ने कहा कि देश में सहकारिता को बढ़ावा देने,सहकारिता के माध्यम से ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊपर उठाने और छोटे किसानों को समृद्ध बनाने का काम सिर्फ़ युवा ही कर सकते हैं।केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में रोज़गार मिलने के बाद भी युवाओं को इसे आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि काम में तनख़्वाह के साथ ही काम से संतुष्टि भी बहुत ज़रूरी है और यह तभी मिल सकती है जब आप सहकारिता के विस्तार के लिए कार्य करें। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण वर्ष है क्योंकि यह आज़ादी के अमृत महोत्सव का वर्ष है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता के सामने आज़ादी के अमृत महोत्सव के दो उद्देश्य रखे हैं।एक देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले जाने-अंजाने शहीदों को देश याद करना,उन्हें श्रद्धांजलि देना और दूसरा देश भर के युवाओं में एक बार फिर देशभक्ति की  जोत जगाने के साथ ही यह संकल्प लेना कि जब आज़ादी के सौ साल होंगे तब भारत कैसा होगा। अमित शाह ने कहा कि अगर हमारे देश की आज की पीढ़ी यह सोचती है कि जब आज़ादी के सौ साल होंगे तब देश कैसा होगा तभी इसकी उपयोगिता है।इसके लिए सोचने के साथ-साथ संकल्प भी लेना होगा। उन्होंने कहा कि कुछ संकल्प देश के नाते लेने होंगे,कुछ क्षेत्रों को लेने होंगे और कुछ संकल्प व्यक्ति के नाते लेने होंगे कि अगले 25 साल मैं देश के लिए क्या करूँगा। यदि 130 करोड़ लोग छोटा छोटा संकल्प लें और जीवन भर उसका पालन करें तो बहुत अधिक ऊर्जा निर्मित होगी।उन्होंने कहा कि जब 130 करोड़ लोग संकल्प लेते हैं तो इन संकल्पों का संपुट देश इतने आगे ले जाएगा कि दुनिया की आंखें चौंधिया जाएँगीं।श्री शाह ने कहा कि अगले 25 साल का समय आज़ादी का अमृत काल है,इसमें जो संकल्प लेते हैं उन्हें सिद्धि में परिवर्तित करना है,उन्हें पूरा करना है। अमित शाह ने कहा कि हमारे देश में सामूहिक संकल्प की प्रथा ही समाप्त हो गई थी,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे आगे बढ़ाया है।उन्होने कहा कि आज कोरोना की स्टडी करने के लिए दुनियाभर के कई देशों के दल आते हैं और पूछते हैं कि जब मोदी जी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया तो बिना किसी पुलिस नोटिफिकेशन के प्रधानमंत्री के आह्वान पर 130 करोड़ लोगों ने अपने आपको घर में कैसे रख लिया।श्री शाह ने कहा कि यह बहुत बड़ी बात है और यह घटना बताती है कि अगर हम संकल्प करते हैं तो कठिन से कठिन चीज भी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब कोरोना आया तब पूरी दुनिया चकित थी कि भारत जैसे देश में क्या होगा,जहाँ स्वास्थ्य की सेवाओं का इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है और वास्तविकता भी यही थी,एक ही लैब था पुणे में।लेकिन आज कोई ऐसा जिला नहीं है जहाँ लैब नहीं है,ऑक्सीजन बेड 10 गुना बढे हैं,वेंटिलेटर 6 गुना बढे हैं,50 बिस्तर से ऊपर वाले अस्पतालों में अपना ऑक्सीजन उत्पादन है। यह सारे परिवर्तन 2 साल में किये गये हैं,130 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन हो रहा है,आज 155 करोड से अधिक वैक्सीन की डोज देने का काम समाप्त कर दिया है और व्यवस्था ऐसी है कि कुछ ही सेकंड में आपके मोबाइल पर सर्टिफिकेट आ जाएगा कि आपको दोनों डोज लग गए हैं,दुनिया भर में ऐसी व्यवस्था कहीं नहीं है। आप जैसे बच्चों ने ही यह कोवीन ऐप बनाया है और आज दुनियाभर के देश कोवीन ऐप मांग रहे हैं।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मोदी जी ने प्रेरणा दी मगर काम तो देश के लोगों ने किया है,आप जैसे युवाओं ने किया और देखते ही देखते देश को कोरोना संकट से बाहर निकाल दिया।

अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक
Author: अपना छत्तीसगढ़ / अक्षय लहरे / संपादक

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